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आज का चिंतन # 332 समय देना पड़ता है.. आज दौड़ भाग की जिंदगी में बहुत तेजी है; वाहनों की गति तेज, सामान की सप्लाई तेज, सूचना का संप्रेषण तत्काल इत्यादि। लेकिन कुछ अच्छा सोचने, समझने और करने के लिए, समय देना ही पड़ता है। प्रकृति..प्रकृति के अपने नियम हैं और अपनी गति है। सृजन
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आज का चिंतन # 331 प्राप्त और प्राप्य.. प्राप्त अर्थात जो हमें मिला है, किसी ने हमको दिया है, जैसे हमको सम्मान प्राप्त हुआ, धन प्राप्त हुआ, साधन और सुविधाएं प्राप्त हुई इत्यादि।प्राप्य अर्थात जिसे हम प्राप्त कर सकते हैं अपनी शक्ति द्वारा, अपने कौशल द्वारा जैसे परीक्षा में सफलता, कार्य में प्रवीणता इत्यादिऔर इस
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आज का चिंतन # 330 कम और कमी.. एक गीत की पंक्तियां है किदुनिया में कितना गम है, मेरा गम कितना कम हैहमारा दुख कम हो जाएगा यदि दूसरों के दुख का हमें पता चल जाए। एक कहावत है कि जीवन में स्वस्थ और सुखी रहना है तोकम खाओ गम खाओअर्थात भूख से थोड़ा कम
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आज का चिंतन # 329 कलम की ताकत.. शब्दों से विचार संप्रेषित होते हैं, उपजते हैं, प्रभावित होते हैं। शब्दों को कलम के माध्यम से जब कागज पर उकेरा जाता है तो वह रस पैदा करते हैं, प्रेरित कर सकते हैं और यहां तक कि क्रांति भी ला सकते हैं। कलम की यह ताकत कवि
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आज का चिंतन # 328 हमारे हाथ में क्या है.. एक बुजुर्ग से बातचीत के दौरान उनका कथन आया कि हम लिख सकते हैं, अपने विचार दूसरों तक पहुंचा सकते हैं इसके अलावा हमारे हाथ में क्या है.. करने को बहुत कुछ है..स्वयं की सेहत के लिए योग, व्यायाम, खानपान का ध्यान; लोगों से यथासंभव
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आज का चिंतन # 327 निष्कर्ष तक पहुंचाना.. किसी भी कार्य को निष्कर्ष तक पहुंचाने की अटूट इच्छा और अथक प्रयास, हमें सफल बनाते हैं, श्रेष्ठ बनाते हैं। हम अपना सर्वोत्तम प्रयास करें, अपना सर्वश्रेष्ठ दें, तब ही हमें संतोष मिल सकता है। कार्य को अधूरा छोड़ देना या रूकावटों को पार करने का संपूर्ण
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आज का चिंतन # 326 बदलना या छोड़ना.. संबंधों में कई बार यह देखने में आता है कि हम दूसरे को बदलने का प्रयास करते हैं, उसे अपने हिसाब से ढालने का प्रयास करते हैं, अपनी इच्छा अनुसार उसे चलाने का प्रयास करते हैं, लेकिन यह कभी भी पूरी तरह संभव नहीं होता है और
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आज का चिंतन # 325 बात नहीं थी.. एक ग़ज़ल का शेर है किजिस्म की बात नहीं थी, उनकी रूह तक जाना था…जिस्म यानी बाहरी आवरण और रूह यानी अंतरात्मा, चेतना।बाहरी दिखावे पर लोग बहुत ज्यादा पैसा, ऊर्जा, समय खर्च करते हैं, लेकिन अपनी आत्मा और चेतना की ओर कदाचित उतना ध्यान और कार्य नहीं
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आज का चिंतन # 324 पहले मैं.. लखनऊ के नवाबों का किस्सा है कि पहले आप, पहले आप.. करते करते गाड़ी छूट गई।एक कहावत यह भी है कि माल उसी का होता है जो पहले हाथ बढ़ा कर उठा लेता है।पहल करने वाला फायदे में रहता है। उसे तसल्ली रहती है कि उसने मौका नहीं
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आज का चिंतन # 323 तेरे घर में… फिल्म में एक डायलॉग सुनते थे कि तेरे घर में मां बहन नहीं है क्या..इस कथन का एक अभिप्राय यह समझ में आया कि दूसरे की सोच में यह बात लाना कि इस स्थिति में तुम्हारा कोई अपना होता तो तुम क्या सोचते और क्या करते..मनुष्य अपनी